कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः
Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma
अट्टशूला जनपदा: शिवशूलाश्षतुष्पथा: । केशशूला: स्त्रियो राजन् भविष्यन्ति युगक्षये,नरव्याप्र! इसी प्रकार रसीले पदार्थभी जैसे चाहिये वैसे स्वादिष्ट नहीं होंगे। राजन्! उस समयकी स्त्रियाँ नाटे कदकी और बहुत संतान (बच्चा) पैदा करनेवाली होंगी। उनमें शील और सदाचारका अभाव होगा। युगान्तकालमें स्त्रियाँ मुखसे भगसम्बन्धी यानी व्यभिचारकी ही बातें करनेवाली होंगी। राजन! युगान्त-कालमें हर देशके लोग अन्न बेचनेवाले होंगे। ब्राह्मण वेद बेचनेवाले तथा (प्रायः) स्त्रियाँ वेश्यावृत्तिको अपनानेवाली होंगी-
vaiśampāyana uvāca | aṭṭaśūlā janapadāḥ śivaśūlāś catuṣpathāḥ | keśaśūlāḥ striyo rājan bhaviṣyanti yugakṣaye naravyāghra |
वैशंपायन म्हणाले— राजन्! युगक्षयी जनपदे जणू अट्टशूलांनी विदीर्ण झाल्यासारखी होतील; चौरस्ते ‘शिवशूल’सारख्या अमंगल चिन्हांनी भरतील; आणि स्त्रियाही ‘केशशूल’ या पीडेला बळी पडतील. ही युगान्ताची दुःखद लक्षणे आहेत.
वैशम्पायन उवाच