Sarasvatī–Tārkṣya Saṃvāda: Agnihotra-vidhi, Dāna-phala, and Mokṣa-prasaṅga (सरस्वती–तार्क्ष्यसंवादः)
कृष्णे धरनुर्वेदरतिप्रधाना- स्तवात्मजास्ते शिशव: सुशीला: । सद्धिः सदैवाचरितं सुहृद्धि- श्वरन्ति पुत्रास्तव याज्ञसेनि,इसके बाद दशार्हकुलके स्वामी श्रीकृष्ण, जो अपने सुहृदोंसे घिरे हुए थे, यज्ञसेनकुमारी द्रौपदीसे बोले--“कृष्णे! अर्जुनसे मिलकर तेरी सारी कामना सफल हो गयी, यह बड़े आनन्दकी बात है। तेरे पुत्र बड़े सुशील हैं। धनुर्वेदमें उनका विशेष अनुराग है। वे अपने सुहृदोंसहित सत्पुरुषोंद्वारा आचरित सदाचार और धर्मका पालन करते हैं
vaiśampāyana uvāca |
kṛṣṇe dhanuḥvedaratipradhānās tavātmajās te śiśavaḥ suśīlāḥ |
sadbhiḥ sadaivācaritaṃ suhṛdbhiś caranti putrās tava yājñaseni ||
“कृष्णे! तुझे पुत्र सुशील व उत्तम चारित्र्याचे आहेत; धनुर्वेदातच त्यांचा प्रधान अनुराग आहे. ते नेहमी सुहृदांसह वावरून सत्पुरुषांनी आचरलेल्या सदाचार व धर्माचे पालन करतात, याज्ञसेनी!”
वैशम्पायन उवाच