अर्जुनागमनम्
Arjuna’s Arrival and Reunion on the Sacred Mountain
आज म्मु: पाण्डवान द्रष्ू शुद्धात्मानो यतव्रता: । ते तैः सह कथां चक्रुर्दिव्यां भरतसत्तमा:,उनका अन्तःकरण शुद्ध था और वे संयम-नियमके साथ उत्तम व्रतका पालन करनेवाले थे। एक दिन वे सभी पाण्डवोंसे मिलनेके लिये आये। भरतशिरोमणि पाण्डवोंने उनके साथ दिव्य चर्चाएँ की
शुद्ध अंतःकरण व संयम-व्रतधारी ते एके दिवशी पांडवांना भेटावयास आले; तेव्हा भरतश्रेष्ठ पांडवांनी त्यांच्याशी दिव्य कथा-चर्चा केली।
वैशम्पायन उवाच