Kuberasaras-darśana (Bhīma beholds Kubera’s guarded lotus-lake) / कुबेरसरः-दर्शनम्
पण्याकरवणिज्याभि: कृष्यागोजाविपोषणै: । विद्यया धार्यते सर्व धर्मरेतैद्विजातिभि:,हाट-बाजार करना, कर (लगान या टैक्स) लेना, व्यापार, खेती, गोपालन, भेड़ और बकरोंका पोषण तथा विद्या पढ़ना-पढ़ाना--इन धर्मानुकूल वृत्तियोंद्वारा द्विजगण सम्पूर्ण जगतकी रक्षा करते हैं
हाट-बाजार, कर-उगाही, व्यापार, शेती, गोपालन, मेंढ्या-बकऱ्यांचे पोषण, तसेच विद्या अध्ययन- अध्यापन—या धर्मानुकूल वृत्तींनी धर्मशील द्विज संपूर्ण जगताचे धारण व रक्षण करतात.
वैशम्पायन उवाच