Sagara’s Aśvamedha Horse Lost; The Sixty-Thousand Sons Begin the Subterranean Search
Kapila Introduced
/ (दाक्षिणात्य अधिक पाठका ३ *लोक मिलाकर कुल २४ ३ “लोक हैं) 3 #ासल ९) अपन अभल पञ्चाधिकशततमोब< ध्याय: अगस्त्यजीके द्वारा समुद्रपान और देवताओंका कालेय देत्योंका वध करके ब्रह्माजीसे समुद्रको पुनः भरनेका उपाय पूछना लोगश उवाच समुद्रं स समासाद्य वारुणिर्भगवानृषि: । उवाच सहितान् देवानृषींश्वैव समागतान्,लोमशजी कहते हैं--राजन! समुद्रके तटपर जाकर मित्रावरुण-नन्दन भगवान् अगस्त्यमुनि वहाँ एकत्र हुए देवताओं तथा समागत ऋषियोंसे बोले--“मैं लोकहितके लिये समुद्रका जल पी लेता हूँ। फिर आपलोगोंको जो कार्य करना हो उसे शीघ्र पूरा कर लें!
Lomaśa uvāca: samudraṃ sa samāsādya vāruṇir bhagavān ṛṣiḥ | uvāca sahitān devān ṛṣīṃś caiva samāgatān ||
लोमश म्हणाले—राजन्! समुद्रतीरी जाऊन मित्र-वरुणनंदन भगवान् अगस्त्य ऋषींनी तेथे जमलेल्या देवांना व आलेल्या ऋषींना संबोधिले.
लोगश उवाच