Dhṛtarāṣṭra’s Reception Plan for Janārdana (Kṛṣṇa): Gifts, Procession, and Protocol
अद्भुतं महदाश्चर्य श्रूयते कुरुनन्दन । स्त्रियो बालाश्च वृद्धाश्व कथयन्ति गृहे गृहे,“कुरुनन्दन! एक अद्भुत और अत्यन्त आश्वर्यकी बात सुनायी देती है। घर-घरमें स्त्री बालक और बूढ़े इसीकी चर्चा करते हैं। जो यहाँके निवासी हैं, वे तथा जो बाहरसे आये हुए हैं, वे भी आदरपूर्वक उसी बातको कहते हैं। चौराहोंपर और सभाओंमें भी पृथक्-पृथक् वही चर्चा चलती है
adbhutaṁ mahad āścaryaṁ śrūyate kurunandana | striyo bālāś ca vṛddhāś ca kathayanti gṛhe gṛhe ||
वैशंपायन म्हणाले—कुरुनंदना, एक महान व अद्भुत आश्चर्याची गोष्ट ऐकू येत आहे. घरोगरी स्त्रिया, बालके आणि वृद्ध त्याचाच उल्लेख करीत आहेत.
वैशम्पायन उवाच