Dhṛtarāṣṭra’s Inquiry and Sañjaya’s Etymologies of Kṛṣṇa’s Names
Puruṣottama-nāma-nirvacana
धृतराष्ट उवाच अड़ संजय मे शंस पन्थानमकुतो भयम् । येन गत्वा हृषीकेशं प्राप्तुयां सिद्धिमुत्तमाम्,धृतराष्ट्र बोले--वत्स संजय! तुम मुझे वह निर्भय मार्ग बताओ, जिससे चलकर मैं सम्पूर्ण इन्द्रियोंके स्वामी परममोक्षस्वरूप भगवान् श्रीकृष्णको प्राप्त कर सकूँ
धृतराष्ट्र म्हणाला—वत्स संजय, मला तो निर्भय मार्ग सांग, ज्याने जाऊन मी हृषीकेश श्रीकृष्णांना प्राप्त करून उत्तम सिद्धी मिळवू शकेन.
धृतराष्ट उवाच