Sainyasaṅgraha and Bhāga-Vyavasthā (Forces Assembled and Rival Allocations) | सैन्यसंग्रह-भागव्यवस्था
सर्वे समधिरूढा: सम संग्रामान्न: समुद्धर । जानामि त्वां महाबाहो क्षत्रधर्मे व्यवस्थितम्,इस प्रकार बोलते हुए धृष्टद्युम्नसे धर्मात्मा राजा युधिष्ठिरने कहा--“महाबाहो! पाण्डवोंसहित समस्त पांचाल वीर तुम्हारे धैर्य और पराक्रमका ही आश्रय लेकर युद्धके लिये उद्यत हुए हैं, इसलिये तुम्हीं इस संग्रामसे हमलोगोंका उद्धार करो। मैं जानता हूँ कि तुम क्षत्रियधर्ममें प्रतेष्ठित हो और युद्धकी इच्छासे सामने आये हुए समस्त कौरवोंको अकेले ही कैद कर लेनेकी पूरी शक्ति रखते हो
sañjaya uvāca |
sarve samadhirūḍhāḥ sama-saṅgrāmān naḥ samuddhara |
jānāmi tvāṃ mahābāho kṣatra-dharme vyavasthitam |
संजय म्हणाला—“आम्ही सर्वजण समान निर्धाराने आरूढ व सिद्ध आहोत; म्हणून या संग्रामातून आमचा उद्धार करा. महाबाहो! तुम्ही क्षत्रियधर्मात दृढ स्थित आहात—आणि मित्रांसाठीही युद्धाचे ओझे पेलण्यास समर्थ आहात—हे मला ठाऊक आहे.”
संजय उवाच