Saṃjaya’s Warning to Dhṛtarāṣṭra: Accountability, Alliance-Shift, and the Pāṇḍava Strategic Edge
क्षपयिष्यति नो राजन् कालचक्रमिवोद्यतम् | राजन्! इस प्रकार इन सभी श्रेष्ठतम वस्तुओंको अपने साथ लिये हुए जब श्वेत घोड़ोंवाले अर्जुन रथपर आरूढ़ हो रणभूमिमें उपस्थित होंगे, उस समय ऊपर उठे हुए कालचक्रके समान वे हम सब लोगोंका संहार कर डालेंगे || १३ हू ।। तस्याद्य वसुधा राजन् निखिला भरतर्षभ
kṣapayīṣyati no rājan kālacakram ivodyatam |
संजय म्हणाला—हे राजन्, उचललेल्या कालचक्राप्रमाणे तो आपला सर्वांचा संहार करील. हे भरतश्रेष्ठ, आजपासून ही अखिल पृथ्वी त्याच्याच अधीन होईल.
संजय उवाच