Nara-Nārāyaṇa Precedent and Bhīṣma’s Counsel on Kṛṣṇa–Arjuna; Karṇa’s Reply
अपना छा अकाल एकोनपज्चाशत्तमो<्ध्याय: भीष्मका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा बताना एवं कर्णपर आक्षेप करना, कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसका पुनः उपहास एवं द्रोणाचार्यद्वारा भीष्मजीके कथनका अनुमोदन वैशम्पायन उवाच समवेतेषु सर्वेषु तेषु राजसु भारत । दुर्योधनमिदं वाक््यं भीष्म: शान्तनवोडब्रवीत्,वैशम्पायनजी कहते हैं--भारत! वहाँ एकत्र हुए उन समस्त राजाओंकी मण्डलीमें शान्तनुनन्दन भीष्मने दुर्योधनसे यह बात कही--
vaiśampāyana uvāca | samaveteṣu sarveṣu teṣu rājasu bhārata | duryodhanam idaṃ vākyaṃ bhīṣmaḥ śāntanavo 'bravīt ||
वैशंपायन म्हणाला—हे भारत! ते सर्व राजे तेथे एकत्र जमले असता, शान्तनुनंदन भीष्माने दुर्योधनाला हे वचन सांगितले.
वैशम्पायन उवाच