Vidura-nīti: Atithi-dharma, Trust, Counsel-Secrecy, and Traits of Sustainable Rule
Udyoga Parva, Adhyāya 38
कृतज्ञं धार्मिक सत्यमक्षुद्रं दृढभक्तिकम् । जितेन्द्रियं स्थितं स्थित्यां मित्रमत्यागि चेष्यते,मित्र तो ऐसा होना चाहिये, जो कृतज्ञ, धार्मिक, सत्यवादी, उदार, दृढ़ अनुराग रखनेवाला, जितेन्द्रिय, मर्यादाकं भीतर रहनेवाला और मैत्रीका त्याग न करनेवाला हो
मित्र असा असावा—जो कृतज्ञ, धार्मिक, सत्यवादी, उदार, दृढ अनुरागी, जितेन्द्रिय, मर्यादेत स्थिर आणि मैत्रीचा त्याग न करणारा असेल।
विदुर उवाच