Drupada’s Alarm and Inquiry Regarding Śikhaṇḍinī (द्रुपदस्य भय-विमर्शः)
कुरुनन्दन! उसे इस रूपमें देखकर कुबेर अत्यन्त कुपित हो उठे और शाप देते हुए बोले--'गुह्मको! इस पापी स्थूणाकर्णका यह स्त्रीत्व अब ऐसा ही बना रहे' ।। ततोडब्रवीद् यक्षपतिर्महात्मा यस्माददास्त्ववमन्येह यक्षान् शिखण्डिने लक्षण पापबुद्धे स्त्रीलक्षणं चाग्रही: पापकर्मन्,तदनन्तर महात्मा यक्षराजने उस यक्षसे कहा--'पापबुद्धि और पापाचारी यक्ष! तूने यक्षोंका तिरस्कार करके यहाँ शिखण्डीको अपना पुरुषत्व दे दिया और उसका स्त्रीत्व ग्रहण कर लिया है। दुर्बुद्धे! तूने जो यह अव्यावहारिक कार्य कर डाला है, इसके कारण आजसे तू स्त्री ही बना रहे और शिखण्डी पुरुषरूपमें ही रह जाय”
tato 'bravīd yakṣapatir mahātmā | yasmād adās tv avamanyeh yakṣān | śikhaṇḍine lakṣaṇa pāpabuddhe strīlakṣaṇaṃ cāgrahīḥ pāpakarman ||
त्यानंतर महात्मा यक्षपती म्हणाला— “पापकर्मा! यक्षांचा अवमान करून तू येथे शिखंडीला आपले पुरुषत्व दिलेस आणि स्त्रीलक्षण स्वीकारलेस. या अनुचित कृत्यामुळे आजपासून तू स्त्रीच राहशील आणि शिखंडी पुरुषरूपातच राहील.”
भीष्म उवाच