अग्निस्तुति, इन्द्रदर्शन, नहुष-भयवर्णन
Agni-hymn, discovery of Indra, and the Nahuṣa threat
पाहि सर्वाश्व लोकांश्व महेन्द्र बलमाप्नुहि | एवं संस्तूयमानश्न सो<5वर्धत शनै: शनै:,“महेन्द्र! आप शक्ति प्राप्त कीजिये और सम्पूर्ण लोकोंकी रक्षा कीजिये।” इस प्रकार स्तुति की जानेपर देवराज इन्द्र धीरे-धीरे बढ़ने लगे
pāhi sarvāś ca lokāṁś ca mahendra balam āpnuhi | evaṁ saṁstūyamānaś ca so 'vardhata śanaiḥ śanaiḥ ||
हे महेंद्र! तू बळ प्राप्त कर आणि सर्व लोकांचे रक्षण कर. अशा प्रकारे स्तुती झाल्यावर देवराज इंद्र हळूहळू वाढू लागला.
शल्य उवाच