Ulūka’s Provocation and Keśava’s Counter-Message (उलूकदूत्ये केशवप्रत्युत्तरम्)
घातयित्वा प्रदास्यामि पार्थेभ्यो राज्यमुत्तमम् । आचचतक्षे च मे सर्व संजयस्तव भाषितम्,“एकमात्र विधाता ही अपने मानसिक संकल्पमात्रसे समस्त प्राणियोंको वशमें कर लेता है। वार्ष्णेय! तुम जो यह कहा करते थे कि मैं युद्धमें धृतराष्ट्रके सभी पुत्रोंकोी मरवाकर उनका सारा उत्तम राज्य कुन्तीके पुत्रोंको दे दूँगा। तुम्हारा वह सारा भाषण संजयने मुझे सुना दिया था
ghātayitvā pradāsyāmi pārthebhyo rājyam uttamam | ācacakṣe ca me sarvaṃ saṃjayas tava bhāṣitam ||
‘त्यांचा संहार करून मी उत्तम राज्य पार्थांना देईन’—हे राजन्! तुझे हे सर्व भाषण संजयने मला जसेच्या तसे सांगितले.
संजय उवाच