उद्योगपर्व अध्याय १३३ — संजये मातृउपदेशः
Udyoga Parva Adhyaya 133 — A Mother’s Counsel to Saṃjaya
यस्य हार्थाभिनिर्वत्तौ भवन्त्याप्यायिता: परे | तस्यार्थसिद्धिर्नियता नयेष्वर्थानुसारिण:,जिसके प्रयोजनकी सिद्धि होनेपर उससे सम्बन्ध रखनेवाले दूसरे लोग भी संतुष्ट एवं उन्नतिको प्राप्त होते हैं, नीतिमार्गपर चलकर अर्थसिद्धिके लिये प्रयत्न करनेवाले उस पुरुषको निश्चय ही अपने अभीष्टकी सिद्धि होती है
yasya hārthābhinirvattau bhavanty āpyāyitāḥ pare | tasyārthasiddhir niyatā nayeṣv arthānusāriṇaḥ ||
ज्याच्या प्रयत्नाची सिद्धी झाल्यावर त्याच्याशी संबंधित इतर लोकही तृप्त व समृद्ध होतात, नीतिमार्गाने अर्थसाधनेस झटणाऱ्या त्या पुरुषास इच्छित फलाची सिद्धी निश्चयाने होते।
पुत्र उवाच