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Shloka 23

उद्योगपर्व (अध्याय १२९) — केशवस्य वैभवप्रदर्शनम् / Krishna’s Theophanic Display in the Kuru Assembly

(यथा वाराणसी दग्धा साश्वा सरथकुंजरा । सानुबन्धस्तु कृष्णेन काशीनामृषभो हतः ।। तथा नागपुरं दग्ध्वा शड्खचक्रगदाधर: । स्वयं कालेश्वरो भूत्वा नाशयिष्यति कौरवान्‌ ।। श्रीकृष्णने जिस प्रकार घोड़े, रथ और हाथियोंसहित वाराणसी नगरी जला दी और काशिराजको उनके सगे-सम्बन्धियोंसहित मार डाला, उसी प्रकार ये शंख, चक्र और गदा धारण करनेवाले भगवान्‌ श्रीकृष्ण स्वयं कालेश्वर होकर हस्तिनापुरको दग्ध करके कौरवोंका नाश कर डालेंगे। पारिजातहरं होनमेक॑ यदुसुखावहम्‌ । नाभ्यवर्तत संरब्धो वृत्रहा वसुभि: सह ।। “यदुकुलको सुख पहुँचानेवाले श्रीकृष्ण जब अकेले पारिजातका अपहरण करने लगे, उस समय अत्यन्त कोपमें भरे हुए इन्द्रने इनके ऊपर वसुओंके साथ आक्रमण किया। परंतु वे भी इन्हें पराजित न कर सके। प्राप्प निर्मोचने पाशान्‌ षट्‌ सहस्रांस्तरस्विन: । हृतास्ते वासुदेवेन हुपसंक्रम्य मौरवान्‌ ।। “निर्मोचन नामक स्थानमें मुर दैत्यने छ: हजार शक्तिशाली पाश लगा रखे थे, जिन्हें इन वसुदेवनन्दन श्रीकृष्णने निकट जाकर काट डाला। द्वारमासाद्य सौभस्य विधूय गदया गिरिम्‌ । द्युमत्सेन: सहामात्य: कृष्णेन विनिपातित: ।। “इन्हीं श्रीकृष्णने सौभके द्वारपर पहुँचकर अपनी गदासे पर्वतको विदीर्ण करते हुए मन्त्रियोंसहित द्युमत्सेनको मार गिराया था। शेषवत्त्वात्‌ कुरूणां तु धमपिक्षी तथाच्युत: । क्षमते पुण्डरीकाक्ष: शक्त: सन्‌ पापकर्मणाम्‌ ।। एते हि यदि गोविन्दमिच्छन्ति सह राजशि: । अद्यैवातिथय: सर्वे भविष्यन्ति यमस्य ते ।। “अभी कौरवोंकी आयु शेष है, इसीलिये सदा धर्मपर ही दृष्टि रखनेवाले कमलनयन भगवान्‌ श्रीकृष्ण इन पापाचारियोंको दण्ड देनेमें समर्थ होकर भी अभी क्षमा करते जा रहे हैं। यदि ये कौरव अपने सहयोगी राजाओंके साथ गोविन्दको बन्दी बनाना चाहते हैं तो सब- के-सब आज ही यमराजके अतिथि हो जायँगे। यथा वायोस्तृणाग्राणि वशं यान्ति बलीयस: । तथा चक्रभृतः सर्वे वशमेष्यन्ति कौरवा: ।। ) 'जैसे तिनकोंके अग्रभाग सदा महाबलवान्‌ वायुके वशमें होते हैं, उसी प्रकार समस्त कौरव चक्रधारी श्रीकृष्णके अधीन हो जायाँगे'। विदुरेणैवमुक्ते तु केशवो वाक्यमब्रवीत्‌

yathā vārāṇasī dagdhā sāśvā sarathakuñjarā | sānubandhas tu kṛṣṇena kāśīnām ṛṣabho hataḥ || tathā nāgapuraṃ dagdhvā śaṅkhacakragadādharaḥ | svayaṃ kāleśvaro bhūtvā nāśayiṣyati kauravān ||

जसा श्रीकृष्णाने घोडे, रथ व हत्तींसह वाराणसी नगरी जाळून टाकली आणि काशीचा वृषभतुल्य राजा त्याच्या आप्तस्वकीयांसह मारला, तसाच शंख-चक्र-गदा धारण करणारा तोच भगवान् स्वतः कालेश्वर होऊन नागपुर (हस्तिनापूर) दग्ध करून कौरवांचा नाश करील.

यथाjust as
यथा:
TypeIndeclinable
Rootयथा
वायोःof the wind
वायोः:
Adhikarana
TypeNoun
Rootवायु
FormMasculine, Genitive, Singular
तृण-अग्राणिtips of blades of grass
तृण-अग्राणि:
Karta
TypeNoun
Rootतृणाग्र
FormNeuter, Nominative, Plural
वशम्into control/subjection
वशम्:
Karma
TypeNoun
Rootवश
FormMasculine, Accusative, Singular
यान्तिgo, come
यान्ति:
TypeVerb
Rootया
FormPresent, Third, Plural, Parasmaipada
बलीयसःof the stronger (one)
बलीयसः:
Adhikarana
TypeAdjective
Rootबलीयस्
FormMasculine, Genitive, Singular
तथाso, likewise
तथा:
TypeIndeclinable
Rootतथा
चक्र-भृतःof the discus-bearer (Krishna)
चक्र-भृतः:
Adhikarana
TypeNoun
Rootचक्रभृत्
FormMasculine, Genitive, Singular
सर्वेall
सर्वे:
Karta
TypeAdjective
Rootसर्व
FormMasculine, Nominative, Plural
वशम्into subjection
वशम्:
Karma
TypeNoun
Rootवश
FormMasculine, Accusative, Singular
एष्यन्तिwill go/come
एष्यन्ति:
TypeVerb
Root
FormFuture, Third, Plural, Parasmaipada
कौरवाःthe Kauravas
कौरवाः:
Karta
TypeNoun
Rootकौरव
FormMasculine, Nominative, Plural

वैशम्पायन उवाच

V
Vaiśaṃpāyana
K
Kṛṣṇa (Keśava, Vāsudeva)
V
Vārāṇasī
K
Kāśī
K
Kāśirāja (lord of Kāśī)
N
Nāgapura (Hastināpura)
K
Kauravas
Ś
Śaṅkha (conch)
C
Cakra (discus)
G
Gadā (mace)
K
Kāla (Time/Death as a cosmic force)