Adhyāya 128 — Proposal to Restrain Keśava; Sātyaki’s Warning and Vidura–Dhṛtarāṣṭra Counsel
दुर्योधन यदाह त्वां पिता भरतसत्तम | भीष्मो द्रोण: कृप: क्षत्ता सुहृदां कुरु तद् वच:,“भरतश्रेष्ठ दुर्योधन! तुम्हारे पिता, पितामह भीष्म, आचार्य द्रोण, कृपाचार्य और विदुर तुमसे जो कुछ कहते हैं, अपने इन सुहृदोंकी वह बात मान लो
vaiśampāyana uvāca | duryodhana yad āha tvāṃ pitā bharatasattama | bhīṣmo droṇaḥ kṛpaḥ kṣattā suhṛdāṃ kuru tad vacaḥ ||
भरतश्रेष्ठ दुर्योधना, तुझे तुझा पिता, पितामह भीष्म, द्रोण, कृप आणि क्षत्ता विदुर जे सांगतात, त्या सुहृदांचे वचन पाळ.
वैशम्पायन उवाच