Treasury Security, Protection of Informants, and the Kalakavṛkṣīya Exemplum (Śānti Parva 83)
श्रोतव्यमस्य च रहो रक्ष्यश्षामात्यतो भवेत् | अमात्या हापहर्तारो भूयिष्ठं घ्नन्ति भारत,भरतवंशी युधिष्ठिर! यदि मन्त्री राजाके खजानेसे धनका अपहरण करता हो और कोई सेवक अथवा राजाके द्वारा पालित हुआ दूसरा कोई मनुष्य राजकीय कोषके नष्ट होनेका समाचार राजाको बतावे, तब राजाको उसकी बात एकान्तमें सुननी चाहिये और मन्त्रीसे उसके जीवनकी रक्षा करनी चाहिये; क्योंकि चोरी करनेवाले मन्त्री अपना भंडाफोड़ करनेवाले मनुष्यको प्राय: मार डाला करते हैं
śrotavyam asya ca raho rakṣyaś cāmātyato bhavet | amātyā hāpahartāro bhūyiṣṭhaṃ ghnanti bhārata ||
भीष्म म्हणाले—त्याची वार्ता एकांतात ऐकावी आणि मंत्र्यापासून त्याचे रक्षण करावे. हे भारतवंशजा! अपहार करणारे मंत्री बहुधा उघड करणाऱ्याला ठार मारतात.
भीष्म उवाच