Daṇḍanīti and the King as the Cause of Yuga-Order (दण्डनीतिः राजधर्मश्च युगकारणत्वम्)
परिखाश्लैव कौरव्य प्रतोलीर्निष्कुटानि च । न जात्वन्य: प्रपश्येत गुह्ममेतद् युधिष्ठिर,कुरुनन्दन युधिष्ठिर! अन्नके भण्डार, शस्त्रागार, योद्धाओंके निवासस्थान, अश्वशालाएँ, गजशालाएँ, सैनिक शिविर, खाई, गलियाँ तथा राजमहलके उद्यान--इन सब स्थानोंको गुप्तरीतिसे बनवाना चाहिये, जिससे कभी दूसरा कोई देख न सके
parikhāś caiva kauravya pratolīr niṣkuṭāni ca | na jātvan anyaḥ prapaśyet guhyam etad yudhiṣṭhira ||
कौरव्य युधिष्ठिर! परिखा, प्रतोली (द्वार-प्रासाद) आणि निष्कुट (अंतःप्राकार) अशी रचना करावी की बाहेरचा कोणीही कधी त्यांना पाहू शकणार नाही; हे गुप्त आहे।
भीष्म उवाच