शान्ति पर्व (अध्याय 38): युधिष्ठिरस्य राजधर्म-जिज्ञासा तथा भीष्मोपसर्पण-प्रस्तावना | Shanti Parva Chapter 38: Yudhishthira’s Inquiry into Rajadharma and the Prelude to Approaching Bhishma
इस प्रकार राजकुलके द्वारपर माड्लिक द्रव्योंद्वारा पूजित हो ब्राह्मणोंके दिये हुए आशीर्वाद सब ओरसे ग्रहण करके राजा युधिष्छिर देवराज इन्द्रके महलके समान राजभवनमें प्रविष्ट हुए, जो श्रद्धा और विजयसे सम्पन्न था। वहाँ पहुँचकर वे रथसे नीचे उतरे ।। प्रविश्याभ्यन्तरं श्रीमान् दैवतान्यभिगम्य च । पूजयामास रत्नैश्व गन्धमाल्यैश्न सर्वश:,राजमहलके भीतर प्रवेश करके श्रीमान् नरेशने कुलदेवताओंका दर्शन किया और रत्न, चन्दन तथा माला आदिसे सर्वथा उनकी पूजा की
vaiśampāyana uvāca | praviśyābhyantaraṃ śrīmān daivatāny abhigamya ca | pūjayāmāsa ratnaiś ca gandha-mālyaiś ca sarvaśaḥ ||
वैशंपायन म्हणाले—राजमहलाच्या अंतर्भागात प्रवेश करून, श्रीमान् नरेशाने कुलदेवतांकडे जाऊन रत्ने, सुगंधी द्रव्ये (चंदन इत्यादी) व माळा यांनी सर्व प्रकारे त्यांची पूजा केली.
वैशम्पायन उवाच