Prāyaścitta-vidhāna: Tapas, Dāna, Vrata, and Proportional Expiation (प्रायश्चित्तविधानम्)
चिकित्सकस्य यच्चान्नमभोज्यं रक्षिणस्तथा । “जिसने यज्ञकी दीक्षा ली हो उसका अन्न अग्निषोमीय होमविशेषके पहले अग्राह्म है। कंजूस, यज्ञ बेचनेवाले, बढ़ई, चमार या मोची, व्यभिचारिणी स्त्री, धोबी, वैद्य तथा चौकीदारका अन्न भी खाने योग्य नहीं है
cikitsakasya yac cānnam abhojyaṃ rakṣiṇas tathā |
वैद्याचे अन्नही भक्षणयोग्य नाही; तसेच रक्षी (चौकीदार) याचे अन्नही अभोज्य आहे।
व्यास उवाच