Atithi-prāpti and the Brāhmaṇa’s Deliberation on Triadic Dharma (अतिथिप्राप्तिः धर्मत्रयविचारश्च)
गच्छथ्वं स्वानधीकारांश्षिन्तय ध्वं यथाविधि । प्रवर्तन्तां क्रिया: सर्वा: सर्वलोकेषु मा चिरम्,“तुम सब लोग जाओ और अपने-अपने अधिकारोंका विधिपूर्वक पालन करो। समस्त लोकोंमें सम्पूर्ण वैदिक क्रियाएँ अविलम्ब प्रचलित हो जानी चाहिये
तुम्ही सर्व जाऊन विधिपूर्वक आपापले अधिकार-कर्तव्य पाळा. सर्व लोकांत सर्व क्रिया विलंब न करता प्रवर्तित होवोत.
वैशम्पायन उवाच