Atithi-prāpti and the Brāhmaṇa’s Deliberation on Triadic Dharma (अतिथिप्राप्तिः धर्मत्रयविचारश्च)
प्रदिशस्व बल॑ तस्य यो5धिकारार्थचिन्तक: । एवमुक्तो महादेवो देवांस्तानिदमब्रवीत्,“उस अधिकार और प्रयोजनका चिन्तन करनेवाला जो पुरुष है, उसे आप कर्तव्यपालनकी शक्ति प्रदान कीजिये।” उनके ऐसा कहनेपर महान् देव ब्रह्माजीने उन देवताओंसे इस प्रकार कहा
pradiśasva balaṁ tasya yo ’dhikārārthacintakaḥ | evam ukto mahādevo devāṁs tān idam abravīt |
“जो त्या अधिकार व प्रयोजनाचा विचार करतो, त्याला कर्तव्यपालनाचे बळ द्या.” असे म्हटल्यावर महादेव ब्रह्मदेवांनी त्या देवांना असे सांगितले।
वैशम्पायन उवाच