Adhyātma–Adhibhūta–Adhidaivata Correspondences and the Triguṇa Lakṣaṇas (Śānti-parva 301)
संयोगानां क्षयं दृष्टवा युगानां च विशेषत: । क्षयं च दृष्टवा शैलानां क्षयं च सरितां तथा,संयोगोंका, युगोंका, पर्वतोंका और सरिताओंका जो क्षय होता है, उसपर दृष्टि डाले। वर्णोका क्षय और क्षयका अन्त भी बारंबार देखे। जन्म, मृत्यु और जरावस्थाके दु:खोंपर दृष्टिपात करे
संयोगांचा क्षय, विशेषतः युगांचा क्षय, तसेच पर्वतांचा आणि सरितांचाही क्षय—या सर्वांकडे दृष्टि द्यावी.
भीष्म उवाच