Śrī–Indra–Bali Saṃvāda: The Departure and Fourfold Placement of Lakṣmī
सर्वसंन्यासधर्माणां तत्त्वज्ञानविनिश्चये । सुपर्यवसितार्थश्न निर्दधन्द्रो नष्टसंशय:,वे सम्पूर्ण संन्यास-धर्मोंके ज्ञाता और तत्त्वज्ञानके निर्णयमें एक सुनिश्चित सिद्धान्तके पोषक थे। उनके मनमें किसी प्रकारका संदेह नहीं था। वे निर्द्धनद्ध होकर विचरा करते थे
ते सर्व संन्यासधर्मांचे ज्ञाते आणि तत्त्वज्ञानाच्या निर्णयात पूर्णतः निश्चित होते; द्वंद्वातीत, संशयरहित होऊन ते निर्धनभावाने विचरत असत।
भीष्म उवाच