नृशंस-लक्षणनिर्णयः | Determining the Marks of Cruel Conduct
Nṛśaṃsa
वायुरुवाच अहमप्येवमेव त्वां कुर्वाण: शाल्मले रुषा | आत्मना यत्कृतं कृच्छे शाखानामपकर्षणम्,वायुने कहा--शाल्मले! मैं भी रोषमें भरकर तुम्हें ऐसा ही बना देना चाहता था। तुमने स्वयं ही यह कष्ट स्वीकार कर लिया है, तुम्हारी शाखाएँ गिर गयीं, फूल पत्ते, डालियाँ और अंकुर सभी नष्ट हो गये। तुमने अपनी ही कुमतिसे यह विपत्ति मोल ली है। तुम्हें मेरे बल और पराक्रमका शिकार बनना पड़ा है
vāyur uvāca: aham apy evam eva tvāṁ kurvāṇaḥ śālmale ruṣā | ātmanā yat kṛtaṁ kṛcchre śākhānām apakarṣaṇam ||
वारा म्हणाला—हे शाल्मली! मीही रागाने तुला अशीच अवस्था करावी असे इच्छित होतो; पण फांद्यांचे हे क्लेशदायक अपकर्ष तू स्वतःच करून घेतलेस.
भीष्म उवाच