अविश्वास-निति: ब्रह्मदत्त–पूजनी-संवादः
Policy of Caution: The Brahmadatta–Pūjanī Dialogue
अनिमित्तात् सम्भवन्ति तथायज्ञ: प्रजायते,धर्मज्ञ राजा अपनी शक्तिके अनुसार उसी-उसी तरह लोकोंपर विजय प्राप्त करे, जैसे उद्भिज्ज जन्तु (वृक्ष आदि) अपनी शक्तिके अनुसार आगे बढ़ते हैं तथा जैसे वज्कीट आदि क्षुद्र जीव बिना ही निमित्तके उत्पन्न हो जाते हैं, वैसे ही बिना ही कारणके यज्ञहीन कर्तव्यविरोधी मनुष्य भी राज्यमें उत्पन्न हो जाते हैं। अत: राजाको चाहिये कि मच्छर, डाँस और चींटी आदि कीटोंके साथ जैसा बर्ताव किया जाता है, वही बर्ताव उन सत्कर्मविरोधियोंके साथ करे, जिससे धर्मका प्रचार हो
bhīṣma uvāca | animittāt sambhavanti tathāyajñaḥ prajāyate | dharmajño rājā svaśakty-anusāreṇa tathā tathā lokān vijayet, yathodbhijja-jantavaḥ (vṛkṣādayaḥ) svaśakty-anusāreṇa vardhante, tathā valmīka-kīṭādayaḥ kṣudra-jīvā animittata eva jāyante; evam eva nirhetukam yajña-hīnāḥ kartavya-virodhinaś ca manuṣyā rāṣṭre prajāyante | ataḥ rājñā maśaka-daṃśa-pipīlikā-ādi-kīṭeṣu yathā vyavahāraḥ kriyate, tathā satkarma-virodhiṣu vyavahāraḥ kartavyaḥ, yena dharmasya pracāraḥ syāt |
भीष्म म्हणाले—काही जीव कोणत्याही निमित्ताविना उत्पन्न होतात; तसेच यज्ञाचा अभावही निर्माण होतो. धर्मज्ञ राजा आपल्या शक्तीनुसार लोकांवर अधिकार प्रस्थापित करो—जसे उद्भिज्ज जीव आपल्या क्षमतेनुसार वाढतात. आणि जसे मुंगी इत्यादी क्षुद्र कीटक अकस्मात् दिसून येतात, तसेच राज्यातही कोणतेही स्पष्ट कारण नसताना यज्ञहीन व कर्तव्यविरोधी मनुष्य उभे राहतात. म्हणून राजाने सत्कर्मविरोधकांशी मच्छर, डास व मुंगी यांसारख्या उपद्रवी कीटकांप्रमाणेच वागावे, जेणेकरून धर्माचा प्रचार होईल.
भीष्म उवाच