Kośa, Bala, and Maryādā: Treasury, Capacity, and Enforceable Limits (कोश-बल-मर्यादा)
उपमामत्र वक्ष्यामि धर्मतत्त्वप्रकाशिनीम् । यूपं छिन्दन्ति यज्ञार्थ तत्र ये परिपन्थिन:,अब मैं यहाँ धर्मके तत्त्वको प्रकाशित करनेवाली एक उपमा बता रहा हूँ। ब्राह्मणलोग यज्ञके लिये यूप निर्माण करनेके उद्देश्यसे वृक्षका छेदन करते हैं। उस वृक्षको काटकर बाहर निकालनेमें जो-जो पार्श्ववर्ती वृक्ष बाधक होते हैं उन्हें भी निश्चय ही वे काट डालते हैं। वे वृक्ष भी गिरते समय दूसरे-दूसरे वनस्पतियोंको भी प्राय: तोड़ ही डालते हैं
upamām atra vakṣyāmi dharmatattvaprakāśinīm | yūpaṃ chindanti yajñārthaṃ tatra ye paripanथinaḥ ||
आता मी येथे धर्मतत्त्व प्रकाश करणारी एक उपमा सांगतो. यज्ञासाठी यूप तयार करण्याकरिता लोक वृक्ष तोडतात; आणि त्या कामात जे आडवे येऊन मार्ग अडवितात, त्यांनाही ते छेदून टाकतात.
भीष्म उवाच