Kārttikeya-Abhiṣecana: Mātṛgaṇa-Nāma Saṃkīrtana and Skanda’s Commission
वर्धनं नन्दनं चैव सर्वविद्याविशारदौ । स्कन्दाय ददतु: प्रीतावश्चिनौ भिषजां वरौ,रुद्रर्वसुभिरादित्यैरश्विभ्यां च वृतः प्रभु: । महापराक्रमी इन्द्र और विष्णु, सूर्य और चन्द्रमा, धाता और विधाता, वायु और अग्नि, पूषा, भग, अर्यमा, अंश, विवस्वान्ू, मित्र और वरुणके साथ बुद्धिमान् रुद्रदेव, एकादश रुद्रणण, आठ वसु, बारह आदित्य और दोनों अश्विनीकुमार--ये सब-के-सब प्रभावशाली कुमार कार्तिकेयको घेरकर खड़े हुए सम्पूर्ण विद्याओंमें प्रवीण चिकित्सकचूड़ामणि अश्विनीकुमारोंने प्रसन्न होकर स्कन्दको वर्धन और नन्दन नामक दो सेवक दिये
vardhanaṃ nandanaṃ caiva sarvavidyāviśāradau | skandāya dadatuḥ prītāv aśvinau bhiṣajāṃ varau ||
वैशंपायन म्हणाले—वैद्यांमध्ये श्रेष्ठ आणि सर्व विद्यांत पारंगत असे दोन्ही अश्विनीकुमार प्रसन्न होऊन स्कंदाला वर्धन व नंदन नावाचे दोन अनुचर देऊन गेले. रुद्र, वसु, आदित्य आणि अश्विनीकुमारांनी वेढलेला प्रभु समरात स्थित होता.
वैशम्पायन उवाच