Trita in the Well (Udapāna-kathā) — Balarāma’s Tīrtha Observances
स्निग्धत्वादोषधीनां च भूमेश्नव जनमेजय । जानन्ति सिद्धा राजेन्द्र नष्टामपि सरस्वतीम्,श्रीकृष्णके बड़े भाई हलधारी बलरामने वहाँ विधिपूर्वक स्नान करके उत्तम दान दे एक रात रहकर बड़ी उतावलीके साथ वहाँसे उदपानतीर्थको प्रस्थान किया, जो मंगलकारी आदि तीर्थ है। राजेन्द्र जममेजय! उदपान वह तीर्थ है, जहाँ उपस्थित होनेमात्रसे महान् फलकी प्राप्ति होती है। सिद्ध पुरुष वहाँ ओषधियों (वृक्षों और लताओं)-की स्निग्धता और भूमिकी आर्द्रता देखकर अदृश्य हुई सरस्वतीको भी जान लेते हैं
vaiśampāyana uvāca | snigdhatvād oṣadhīnāṃ ca bhūmeḥ snava janamejaya | jānanti siddhā rājendra naṣṭām api sarasvatīm ||
वैशंपायन म्हणाले— राजेंद्र जनमेजया! औषधींच्या स्निग्धतेमुळे आणि भूमीच्या आर्द्रतेमुळे सिद्ध पुरुष दृष्टीस न दिसणारी सरस्वतीही सूक्ष्म लक्षणांनी ओळखतात.
वैशम्पायन उवाच