Bhīma–Duryodhana Gadāyuddha Saṃkalpa
Resolve for the Mace Duel
संजयने कहा--राजाधिराज! राजन! उस समय भाइयोंसहित युधिष्ठिरने जब इस प्रकार फटकारा, तब जलमें खड़े हुए आपके पुत्रने उन कठोर वचनोंको सुनकर गरम-गरम लंबी साँस छोड़ी। राजा दुर्योधन विषम परिस्थितिमें पड़ गया था और पानीमें स्थित था; इसलिये बारंबार उच्छवास लेता रहा। उसने जलके भीतर ही अनेक बार दोनों हाथ हिलाकर मन-ही-मन युद्धका निश्चय किया और राजा युधिष्ठिरसे इस प्रकार कहा-- ।। ७ “7१ || यूयं ससुह्ृद: पार्था: सर्वे सरथवाहना: । अहमेकः: परिद्यूनो विरथो हतवाहनः,“तुम सभी पाण्डव अपने हितैषी मित्रोंको साथ लेकर आये हो। तुम्हारे रथ और वाहन भी मौजूद हैं। मैं अकेला थका-माँदा, रथहीन और वाहनशाून्य हूँ
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संजय म्हणाला—राजाधिराज, राजन्! त्या वेळी भावांसह युधिष्ठिराने अशा रीतीने फटकारल्यावर, पाण्यात उभ्या असलेल्या तुमच्या पुत्राने ते कठोर शब्द ऐकून पुन्हा पुन्हा दीर्घ व उष्ण निःश्वास सोडले. विषम स्थितीत पडलेला दुर्योधन जलातच राहून वारंवार उच्छ्वास घेत राहिला. मग पाण्याच्या आतच त्याने अनेकदा दोन्ही हात हलवून मनात युद्धाचा निश्चय केला आणि राजा युधिष्ठिरास म्हणाला—“हे पार्थांनो! तुम्ही सर्व सुहृदांसह आला आहात, रथ-वाहनांनी सज्ज आहात; मी एकटाच थकलेला, विरथ व हतवाहन आहे.”
संजय उवाच