वार्यमाणो हि भीष्मेण द्रोणेन विदुरेण च । पाण्डवानां प्रियां भारया द्रौपदी धर्मचारिणीम्,भीष्म, द्रोण और विदुरने बार-बार मना किया तो भी आपके मूढ़ और निर्लज्ज पुत्र दुर्योधनने सूतपुत्र प्रातिकामी-को यह आदेश देकर भेजा कि तुम पाण्डवोंकी प्यारी पत्नी धर्मचारिणी द्रौपदीको सभामें ले आओ
vāryamāṇo hi bhīṣmeṇa droṇena vidureṇa ca | pāṇḍavānāṃ priyāṃ bhāryāṃ draupadīṃ dharmacāriṇīm |
संजय म्हणाला—भीष्म, द्रोण आणि विदुर यांनी वारंवार रोखले तरी तुझा मूढ व निर्लज्ज पुत्र दुर्योधनाने सूतपुत्र प्रातिकामीला आज्ञा देऊन पाठविले—“पांडवांची प्रिय पत्नी, धर्माचरणी द्रौपदीला सभेत घेऊन ये.”
संजय उवाच