तस्या: पार्था: परिकलेशं न क्षंस्यन्ते हामर्षणा: | वृष्णयो वा महेष्वासा: पाज्चाला वा महारथा:,“कुन्तीके पुत्र अमर्षमें भरे हुए हैं। द्रौपदीको जो यहाँ इस प्रकार क्लेश दिया गया है, इसे वे कदापि सहन नहीं करेंगे। सत्यप्रतिज्ञ भगवान् श्रीकृष्णसे सुरक्षित महान् धनुर्धर वृष्णिवंशी अथवा महारथी पांचाल वीर भी इसे नहीं सहेंगे। अर्जुन पांचाल वीरोंसे घिरे हुए अवश्य आयेंगे
tasyāḥ pārthāḥ parikleśaṃ na kṣaṃsyante hāmarṣaṇāḥ | vṛṣṇayo vā maheṣvāsāḥ pāñcālā vā mahārathāḥ |
धृतराष्ट्र म्हणाला—कुंतीचे पुत्र रोषाने पेटले आहेत; द्रौपदीला येथे जो क्लेश दिला आहे तो ते कधीही सहन करणार नाहीत. तसेच महाधनुर्धर वृष्णी आणि महारथी पाञ्चाल वीरही हे सहन करणार नाहीत.
धृतराष्ट उवाच