अक्षविजय-प्रसङ्गः
Escalation of Wagers and Shakuni’s Repeated Declarations of Victory
याज्ञसेन्या: परामृद्धि दृष्टवा प्रजवयलितामिव । स्नुषास्ता धृतराष्ट्रस्य नातिप्रमनसो5भवन्,तत्पश्चात् धृतराष्ट्रकी आज्ञा ले पाण्डवोंने रत्नमय गृहोंमें प्रवेश किया। दुःशला आदि स्त्रियोंने वहाँ आये हुए उन सबको देखा। ट्रपदकुमारीकी प्रज्वलित अग्निके समान उत्तम समृद्धि देखकर धृतराष्ट्रकी पुत्रवधुएँ अधिक प्रसन्न नहीं हुईं
vaiśampāyana uvāca | yājñasenyāḥ parāmṛddhiṃ dṛṣṭvā prajvalitām iva | snuṣās tā dhṛtarāṣṭrasya nātipramanaso 'bhavan ||
वैशंपायन म्हणाले—याज्ञसेनी (द्रौपदी) हिची ज्वलंत अग्नीसारखी अनुपम समृद्धी पाहून धृतराष्ट्राच्या त्या सूनांना फारसा आनंद झाला नाही।
वैशम्पायन उवाच