सहदेव-दक्षिण-दिग्विजयः — Sahadeva’s Southern Conquest and the Māhiṣmatī–Agni Encounter
नचात्र किंचिज्जेतव्यमर्जुनात्र प्रदृश्यते । उत्तरा: कुरवो होते नात्र युद्ध प्रवर्तते,“अर्जुन! यहाँ कोई जीतनेयोग्य वस्तु नहीं दिखायी देती। यह उत्तर कुरुदेश है। यहाँ युद्ध नहीं होता है। कुन्तीकुमार! इसके भीतर प्रवेश करके भी तुम यहाँ कुछ देख नहीं सकोगे, क्योंकि मानव-शरीरसे यहाँकी कोई वस्तु देखी नहीं जा सकती
na cātra kiñcij jetavyam arjunātra pradṛśyate | uttarāḥ kuravo hote nātra yuddha pravartate ||
वैशंपायन म्हणाले—अर्जुना, येथे जिंकण्यासारखे काहीच दिसत नाही. हा उत्तर कुरुदेश आहे; येथे युद्ध प्रवर्तत नाही.
वैशम्पायन उवाच