मागधगिरिव्रजप्रवेशः — Entry into Girivraja and Jarāsandha’s Protocol Inquiry
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल १३ श्लोक हैं) ऑपनआक्राा बा 5 एकोनविशो< ध्याय: चण्डकौशिक मुनिके द्वारा जरासंधका भविष्यकथन तथा पिताके द्वारा उसका राज्याभिषेक करके वनमें जाना श्रीकृष्ण उवाच कस्यचित् त्वथ कालस्य पुनरेव महातपा: । मगधेषूपचक्राम भगवांश्षण्डकौशिक:,श्रीकृष्ण कहते हैं--राजन्! कुछ कालके पश्चात् महातपस्वी भगवान् चण्डकौशिक मुनि पुनः मगधदेशमें घूमते हुए आये
śrīkṛṣṇa uvāca | kasyacit tv atha kālasya punar eva mahātapāḥ | magadheṣūpacakrāma bhagavāñ chaṇḍakauśikaḥ ||
श्रीकृष्ण म्हणाले—राजन्! काही काळानंतर महातपस्वी भगवान चण्डकौशिक मुनी पुन्हा मगधदेशात विचरत आले।
श्रीकृष्ण उवाच