Samrāt-Lakṣaṇa and the Counsel to Check Jarāsandha (सम्राट्-लक्षणं जरासन्ध-प्रतिबाधा-परामर्शः)
भ्राता यस्याकृति: शूरो जामदग्न्यसमो5भवत् | स भक्तो मागध॑ राजा भीष्मक: परवीरहा,राजन! जो पृथ्वीके एक चौथाई भागके स्वामी हैं, इन्द्रके सखा हैं, बलवान हैं, जिन्होंने अस्त्र-विद्याके बलसे पाण्ड्य, क्रथ और कैशिक देशोंपर विजय पायी है, जिनका भाई आकृति जमदग्निनन्दन परशुरामके समान शौर्यसम्पन्न है, वे भोजवंशी शत्रुहन्ता राजा भीष्मक (मेरे श्वशुर होते हुए) भी मगधराज जरासंधके भक्त हैं
bhrātā yasyākṛtiḥ śūro jāmadagnyasamo 'bhavat | sa bhakto māgadhaḥ rājā bhīṣmakaḥ paravīrahā ||
ज्याचा भाऊ आकृती शूर असून जामदग्न्य परशुरामासमान पराक्रमी आहे—तो परवीरहंता भोजराज भीष्मकही मगधराज जरासंधाचा भक्त आहे.
श्रीकृष्ण उवाच