Pitāmaha-sabhā-varṇana & Hariścandra-māhātmya
Description of Brahmā’s Assembly and the Eminence of Hariścandra
यच्च किंचित् त्रिलोकेडस्मिन् दृश्यते स्थाणु जड़रमम् | सर्व तस्यां मया दृष्टमिति विद्धि नराधिप,नरेश्वर! संक्षेपमें यह समझ लो कि तीनों लोकोंमें स्थावर-जंगम भूतोंके रूपमें जो कुछ भी दिखायी देता है, वह सब मैंने उस सभामें देखा था
yac ca kiñcit triloke 'smin dṛśyate sthāṇu-jaṅgamam | sarvaṃ tasyāṃ mayā dṛṣṭam iti viddhi narādhipa nara-īśvara ||
नारद म्हणाले—हे नराधिप, हे नरेश्वर! या त्रिलोकीत स्थावर-जंगम रूपाने जे काही दिसते, ते सर्व मी त्या सभागृहात पाहिले आहे—हे निश्चित जाण.
नारद उवाच