Vaiśravaṇa-sabhā-varṇanam
Description of Kubera’s Assembly Hall
नानाप्रहरणैरुग्रैर्वातिरिव महाजवै: । वृतः सखायमन्वास्ते सदैव धनदं नूप,नृपश्रेष्ठ लाखों भूतसमूहोंसे घिरे हुए उग्र धनुर्थर महाबली पशुपति (जीवोंके स्वामी), शूलधारी, भगदेवताके नेत्र नष्ट करनेवाले तथा त्रिलोचन भगवान् उमापति और क्लेशरहित देवी पार्वती ये दोनों, वामन, विकट, कुब्ज, लाल नेत्रोंवाले, महान् कोलाहल करनेवाले, मेदा और मांस खानेवाले, अनेक प्रकारके अस्त्र-शस्त्र धारण करनेवाले तथा वायुके समान महान् वेगशाली भयानक भूत-प्रेतादिके साथ उस सभामें सदैव धन देनेवाले अपने मित्र कुबेरके पास बैठते हैं
nānāpraharaṇair ugrair vātir iva mahājavaiḥ | vṛtaḥ sakhāyam anvāste sadaiva dhanadaṃ nṛpaśreṣṭha ||
नारद म्हणाले—हे नृपश्रेष्ठ! नानाविध उग्र प्रहरणे धारण करणारे, वाऱ्यासारखे महावेगवान भयानक भूत-प्रेतगणांनी वेढलेला तो आपल्या मित्र, सदैव धन देणाऱ्या धनद कुबेराच्या जवळच नेहमी बसतो.
नारद उवाच