उत्पातदर्शनम् — Portents and Kāla among the Vṛṣṇis
ततो जिगमिषलन्तस्ते वृष्ण्यन्धकमहारथा: । सान्तः:पुरास्तदा तीर्थयात्रामैच्छन् नरर्षभा:,तदनन्तर पुरुषश्रेष्ठ वृष्णि और अन्धक महारथियोंने अपनी स्त्रियोंके साथ उस समय तीर्थयात्रा करनेका विचार किया। अब उनमें द्वारका छोड़कर अन्यत्र जानेकी इच्छा हो गयी थी
त्यानंतर पुरुषश्रेष्ठ ते वृष्णि व अंधक महारथी अंतःपुरासह त्या वेळी तीर्थयात्रा करण्याची इच्छा करू लागले।
वैशम्पायन उवाच