कर्णनिधनश्रवणम् — Hearing of Karṇa’s Fall and Dhṛtarāṣṭra’s Lament
एवमेष क्षयो वृत्त: कर्णार्जुनसमागमे । महेन्द्रेण यथा वृत्रो यथा रामेण रावण:,सामात्यबान्धवो राजन् कर्ण: प्रहरतां वर: । राजन! इस प्रकार कर्ण और अर्जुनके संग्राममें यह भारी संहार हुआ है। जैसे देवराज इन्द्रने वृत्रासुरको, श्रीरामचन्द्रजीने रावणको, नरकशत्रु श्रीकृष्णने नरक और मुरुको तथा भृगुवंशी परशुरामने तीनों लोकोंको मोहित करनेवाला अत्यन्त घोर युद्ध करके समरांगणमें रणदुर्मद शूरवीर कृतवीर्यकुमार अर्जुनको उसके भाई-बन्धुओंसहित मार डाला था, जैसे स्कन्दने महिषासुरका और रुद्रने अन्धकासुरका संहार किया था, उसी प्रकार अर्जुनने योद्धाओंमें श्रेष्ठ युद्धदुर्मद कर्णको द्वैरथयुद्धमें उसके मन्त्री और बन्धुओंसहित मार डाला
sañjaya uvāca | evameṣa kṣayo vṛttaḥ karṇārjunasamāgame | mahendreṇa yathā vṛtro yathā rāmeṇa rāvaṇaḥ, sāmātyabāndhavo rājan karṇaḥ praharatāṃ varaḥ |
संजय म्हणाला—राजन्, कर्ण-अर्जुनांच्या संग्रामात असा हा महाक्षय घडला; जसा महेन्द्राने वृत्राचा आणि रामाने रावणाचा वध केला. तसेच प्रहार करणाऱ्यांत श्रेष्ठ कर्णही, आपल्या मंत्र्यांसह व बंधु-बांधवांसह, नष्ट झाला.
संजय उवाच