Aśvatthāman’s Arrow-Screen and the Confrontation with Yudhiṣṭhira (द्रौणि–युधिष्ठिर-संग्रामः)
पुत्र दद्यां पतिं दद्यां न तु दद्यां सुवीरकम् । यदि कोई पुरुष मद्रदेशकी किसी स्त्रीसे कांजी माँगता है तो वह उसकी कमर पकड़कर खींच ले जाती है और कांजी न देनेकी इच्छा रखकर यह कठोर वचन बोलती है --“कोई मुझसे कांजी न माँगे, क्योंकि वह मुझे अत्यन्त प्रिय है। मैं अपने पुत्रको दे दूँगी, पतिको भी दे दूँगी; परंतु कांजी नहीं दे सकती”
putraṁ dadyāṁ patiṁ dadyāṁ na tu dadyāṁ suvīrakam |
मी पुत्र देईन, पतीही देईन; पण हे सुवीरक मात्र देणार नाही.
कर्ण उवाच