Karṇa’s advance against the Pāṇḍava host; Arjuna’s clash with the Saṃśaptakas (कर्णस्य पाण्डवसेनाप्रवेशः—अर्जुनस्य संशप्तकसंप्रहारः)
अहं हि तुल्य: सर्वेषां भूतानां नात्र संशय: । अधार्मिकास्तु हन्तव्या इति मे वतमाहितम्,तप उग्र॑ समास्थाय नियमे परमे स्थिता: । उस समय देवताओंने दैत्योंको परास्त कर दिया था, यह हमारे सुननेमें आया है। राजन! दैत्योंके परास्त हो जानेपर तारकासुरके तीन पुत्र ताराक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली उग्र तपस्याका आश्रय ले उत्तम नियमोंका पालन करने लगे “इसमें संशय नहीं कि समस्त प्राणियोंके प्रति मेरा समान भाव है, तथापि मैंने यह व्रत ले रखा है कि पापात्माओंका वध कर दिया जाय
ahaṃ hi tulyaḥ sarveṣāṃ bhūtānāṃ nātra saṃśayaḥ | adhārmikās tu hantavyā iti me vratam āhitam | tapa ugraṃ samāsthāya niyame parame sthitāḥ |
यात संशय नाही की सर्व प्राण्यांप्रती माझा भाव समान आहे; तरीही मी हे व्रत धारण केले आहे की अधार्मिकांचा वध केला पाहिजे.
दुर्योधन उवाच