Adhyāya 18 — Sequential Duels and Formation Pressure
Ulūka–Yuyutsu; Śakuni–Sutasoma; Kṛpa–Dhṛṣṭadyumna; Kṛtavarmā–Śikhaṇḍin
संछिन्नरश्मियोकत्राक्षान् व्यनुकर्षयुगान् रथान् | विध्वस्तसर्वसंनाहान् बाणैश्षक्रेडर्जुनस्तदा,अर्जुनने उस समय अपने बाणोंद्वारा शत्रुओंके रथोंकी बड़ी बुरी दशा कर डाली। उनके त्रिवेणुसमूह काट डाले, घोड़ों और पार्श्वरक्षकोंको मार डाला। उन योद्धाओंके हाथोंसे खिसककर तूणीर गिर गये तथा उनके रथोंके पहिये और ध्वज भी नष्ट हो गये। घोड़ोंकी बागडोर, जोत और रथके धुरे भी काट डाले गये। उनके अनुकर्ष और जूए भी चौपट हो गये थे
saṁchinnarasmiyoktrākṣān vyanukarṣayugān rathān | vidhvastasarvasaṁnāhān bāṇaiḥ śakrer arjunas tadā ||
संजय म्हणाला—तेव्हा सव्यसाची अर्जुनाने आपल्या बाणांनी शत्रूंचे रथ उद्ध्वस्त केले. त्याने लगाम, जू व धुरा छेदले; चाके व ध्वज पाडले आणि सर्व संनाह विस्कळीत केला. नियंत्रण व संरक्षण हरपल्याने ते रथ रणांगणावर असहाय झाले.
संजय उवाच