मेरोर्दिग्वर्णनम् / Digvarṇana of Meru: Uttara-Kuru, Bhadrāśva, and Jambūdvīpa Motifs
तत्र स्वयंप्रभा देवी नित्यं वसति शाण्डिली । उत्तरेण तु शृड्गस्य समुद्रान्ते जनाधिप,वहाँ स्वयंप्रभा नामवाली शाण्डिली देवी नित्य निवास करती हैं। जनेश्वर! शृंगवान् पर्वतके उत्तर समुद्रके निकट ऐरावत नामक वर्ष है। अतः इन शिखरोंसे संयुक्त यह वर्ष अन्य वर्षोकी अपेक्षा उत्तम है। वहाँ सूर्यदेव ताप नहीं देते हैं और न वहाँके मनुष्य बूढ़े ही होते हैं
tatra svayaṃprabhā devī nityaṃ vasati śāṇḍilī | uttareṇa tu śṛṅgasya samudrānte janādhipa |
तेथे ‘स्वयंप्रभा’ नावाची शाण्डिली देवी नित्य वास करते. हे जनाधिप! त्या शिखराच्या उत्तरेस, समुद्राच्या काठी, एक प्रदेश आहे.
संजय उवाच