Daiva–Puruṣakāra Discourse and the Elephant-Corps Engagement (भीमगजानीक-सम्भ्रान्ति)
चिच्छेद सहसा राजन्नसम्भ्रान्तो वरासिना । राजन! वे तोमर अभी भीमसेनतक पहुँच ही नहीं पाये थे कि उन महाबाहु पाण्डुकुमारने बिना किसी घबराहटके अपनी अच्छी तलवारसे सहसा उन्हें आकाशमें ही काट डाला
sañjaya uvāca | ciccheda sahasā rājann asambhrānto varāsinā |
संजय म्हणाला—राजन्! ते तोमर अजून भीमसेनापर्यंत पोहोचलेही नव्हते, तोच तो महाबाहु पांडुनंदन न घाबरता आपल्या उत्तम तलवारीने क्षणात आकाशातच त्यांना छेदून टाकला।
संजय उवाच