गौरुडव्यूह-रचना तथा अर्धचन्द्र-प्रत्यव्यूह
Garuḍa Array and the Ardhacandra Counter-Formation
चिच्छेद रथिनां बाणै: शिरांसि भरतर्षभ,जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठ तदा55सीत् तुमुलं महत् । संजय कहते हैं--राजन्! पाण्डवपक्षके लाखों क्षत्रियशिरोमणि महारथी विराट सेनापति शूरवीर श्वेतको आगे करके आपके पुत्र दुर्योधनको अपना बल दिखाते हुए शिखण्डीको सामने रखकर भीष्मके सुवर्णभूषित रथपर चढ़ आये। भारत! वे महारथी श्लेतकी रक्षा करना चाहते थे। इसलिये उसे मारनेकी इच्छावाले योद्धाओंमें श्रेष्ठ भीष्मपर उन्होंने धावा किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया भरतश्रेष्ठ! श्वेतने अपने बाणोंद्वारा बहुत-से रथियोंके मस्तक काट डाले
sañjaya uvāca | ciccheda rathināṁ bāṇaiḥ śirāṁsi bharatarṣabha | jighāṁsantaṁ yudhāṁ śreṣṭha tadā āsīt tumulaṁ mahat ||
संजय म्हणाला—भरतश्रेष्ठा, श्वेताने आपल्या बाणांनी अनेक रथींची शिरे छेदली. आणि जेव्हा योद्ध्यांतील श्रेष्ठ भीष्माला मारण्याच्या प्रयत्नात सर्वजण प्रवृत्त झाले, तेव्हा त्या वेळी युद्ध प्रचंड व तुमुल झाले. त्या दृश्यात पराक्रम व रक्षणभावना क्षणार्धात उन्मत्त संहारात बदलली, कारण लक्ष्य ठरला पूज्य वृद्ध योद्धा.
संजय उवाच