कर्मयोग–ज्ञानयज्ञ–अवतारोपदेश
Karma-Yoga, Jñāna-Yajña, and Avatāra Instruction
क्रोधाद् भवति सम्मोह: सम्मोहात् स्मृतिविशभ्रम: । स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात् प्रणश्यति,क्रोधसे अत्यन्त मूढभाव उत्पन्न हो जाता है, मूढभावसे स्मृतिमें भ्रम हो जाता है, स्मृतिमें भ्रम हो जानेसे बुद्धि अर्थात् ज्ञानशक्तिका नाश हो जाता है और बुद्धिका नाश हो जानेसे यह पुरुष अपनी स्थितिसे गिर जाता है
krodhād bhavati sammohaḥ, sammohāt smṛti-vibhramaḥ | smṛti-bhraṁśād buddhi-nāśo, buddhi-nāśāt praṇaśyati ||
क्रोधातून मोह उत्पन्न होतो; मोहातून स्मृतीचा भ्रम होतो; स्मृतीभ्रंश झाला की बुद्धिनाश होतो; आणि बुद्धिनाश झाला की मनुष्य पतन पावतो.
अजुन उवाच