Bhīṣma-parva Adhyāya 16 — Saṃjaya’s Boon, Bhīṣma’s Protection, and the Dawn Arraying of Armies
दशैते पुरुषव्याप्रा: शूरा परिघबाहव: । अक्षौहिणीनां पतयो यज्वानो भूरिदक्षिणा:,सुबलपुत्र शकुनि, शल्य, स्विन्धुनरेश जयद्रथ, विन्द-अनुविन्द, केकयराजकुमार, काम्बोजराज सुदक्षिण, कलिंगराज श्रुतायुध, राजा जयत्सेन, कोशलनरेश बृहद्वधल तथा भोजवंशी कृतवर्मा--ये दस पुरुषसिंह शूरवीर क्षत्रिय एक-एक अक्षौहिणी सेनाके अधिनायक थे। इनकी भुजाएँ परिघोंके समान मोटी दिखायी देती थीं। इन सबने बड़े-बड़े यज्ञ किये थे और उनमें प्रचुर दक्षिणाएँ दी थीं
daśaite puruṣavyāprāḥ śūrā pari-gha-bāhavaḥ | akṣauhiṇīnāṃ patayo yajvāno bhūri-dakṣiṇāḥ ||
हे दहा पुरुषव्याघ्र शूरवीर, परिघासारख्या भुजांचे, प्रत्येकी एक-एक अक्षौहिणी सेनेचे अधिपती होते. ते यज्ञ करणारे आणि विपुल दक्षिणा देणारे यजमान म्हणून प्रसिद्ध होते।
संजय उवाच