अर्जुनने गंगानन्दन भीष्मके निकट पहुँचकर उन्हें तीखे बाणोंद्वारा पीड़ित करते हुए बड़ी सावधानीके साथ उनपर चढ़ाई की। ठीक वैसे ही, जैसे वनमें कोई मतवाला हाथी किसी मदोनन््मत्त गजराजपर आक्रमण कर रहा हो ।। प्रत्युद्ययौ च तं राजा भगदत्त: प्रतापवान् | त्रिधा भिन्नेन नागेन मदान्धेन महाबल:,तब प्रतापी एवं महाबली राजा भगदत्तने मदान्ध गजराजपर आरूढ़ हो अर्जुनके ऊपर धावा किया। उस हाथीके कुम्भस्थलमें तीन जगहसे मदकी धारा चू रही थी
arjunena gaṅgānandanaṃ bhīṣmaṃ nikatam upasaṃkramya tīkṣṇaiḥ śaraiḥ pīḍayan mahā-sāvadhānena tasminn abhyākrāntam; yathā vane mattaḥ hastī madonmattaṃ gajarājaṃ prati pradhāvati. pratyudyayau ca taṃ rājā bhagadattaḥ pratāpavān | tridhā bhinnena nāgena madāndhena mahābalaḥ ||
अर्जुन गंगानंदन भीष्माजवळ पोहोचून त्यांना तीक्ष्ण बाणांनी पीडा देत, मोठ्या सावधपणे त्यांच्यावर चाल करून गेला—जसा वनात मतवाला हत्ती मदोन्मत्त गजराजावर झडप घालतो. तेव्हा प्रतापी व महाबली राजा भगदत्त मदान्ध गजराजावर आरूढ होऊन अर्जुनावर प्रत्युत्तर हल्ल्यास धावून आला; त्या हत्तीच्या कुम्भस्थळातून तीन धारांनी मद झरत होता।
संजय उवाच